Very sad news 🙏🙏😭
Ashish Kumar BM Chapki branch Mirzapur zone met with an accident during field visit today (Holiday) and lost his life.
Our colleague lost his life, his mother lost her son .... But was it so necessary to call him on a holiday?
Who will be held responsible for it. ZO, definately not because they have not given any such order in black and white. Working on holidays or late sitting is sole responsibility of staff and in case any such accident happens in which one lost his life or becomes disabled only he and his family will only sufer.
Will AGM take responsibility of this unrepairable loss to the family of departed soul who laid his life in line of irresponsible orders given by him. I am damn confident that management is not going to declare that the poor fellow sacrifice his life for the bank duty being holiday today and his family will hardly get any thing for his commitment towards his duty.
I pray the ALMIGHTY to give strength to the bereaved family to bear this unrepairable loss. Om shanti
आशीष कुमार, शाखा प्रबंधक, इंडियन बैंक छपकी शाखा (मिर्ज़ापुर अंचल) की आज सुबह एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मृत्यु हो गई.
आशीष कुमार बैंक के काम से आज छुट्टी वाले दिन भी शाखा में काम करने जा रहे थे क्योंकि उच्चाधिकारियों की तरफ से शाखा को खोलने के निर्देश जारी किए गए थे.
हमारे एक साथी ने जब उस उच्चाधिकारी से बात की तो वो साफ मुकर गए कि मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं जारी किया था. जबकि सोशल मीडिया पर उनके द्वारा जारी किया गया आदेश धड़ल्ले से वायरल हो रहा है.
हफ्ते के 5/6 दिन 9-10 घण्टे काम करने के बाद आपका शरीर थक कर चूर हो जाता है. कितने ही सारे अधिकारी एवं अन्य स्टाफ सदस्य 2-4 घण्टे का सफर अलग से करते हैं ताकि अपनी शाखा समय से पहुंच सकें. शाखा में 300-400 लोगों की भीड़ को रोज़ झेलते हैं ताकि उन्हें सही बैंकिंग सुविधा मुहैया करवाई जा सके.
लेकिन ED एवं MD CEO बनने का ख्वाब लिए आपके कन्ट्रोलिंग ऑफिस में अपने एयर कंडिशन्ड केबिन में बैठे किसी उच्चाधिकारी को ऊपर अपनी इमेज चमकानी है. तो वो साधी हुई इंग्लिश में एक व्हाट्सएप मैसेज लिखता है जिसमें 'mother Institution is in trouble' जैसे emotionally connect करती हुई lines होती हैं और आपको कहा जाता है कि आप छुट्टी वाले दिन भी शाखा आएँ और काम करें.
और आप लोग जाते भी हैं. कुछ मजबूरी में, कुछ उच्चाधिकारियों के टारगेट में आने से बचने के लिए, कुछ उन्हीं उच्चाधिकारियों की नज़रों में चमकने के लिए, कुछ 2500 रुपये एक दिन की दिहाड़ी चित्त करने के लिए, और कुछ सिर्फ इसलिए क्योंकि घर परिवार से उनका मोह खत्म हो चुका है.
वजह चाहे जो भी हो, लेकिन आज एक निर्दोष बैंकर ऐसे ही तानाशाही आदेश की वजह से काल के मुँह में समा गया. अपने परिवार का इकलौता सहारा था वो.
चूंकि दुर्घटना की तस्वीर बड़ी ही वीभत्स है इसलिए आपको दिखा भी नहीं सकते यहाँ. लेकिन एक धुँधली तस्वीर और उस आदेश का स्क्रीनशॉट फिर भी यहाँ दिखा रहे हैं.
एक बात कान खोल कर सुन लें या समझ लें. FGM ZM का सगा नहीं है, ZM DZM का सगा नहीं है, DZM CM का सगा नहीं है. हर कोई एक दूसरे के सामने अपनी इमेज चमकाने में लगा हुआ है. लेकिन अगर कोई तुम्हारा अपना सगा है तो वो है तुम्हारा अपना परिवार. आशीष कुमार का परिवार आज अनाथ हो गया 😞
आज शाम 7 बजे ट्विटर पर ट्रेंड रखा है. हैशटैग है #MurderOfBankers. वैसे तुममें से ज़्यादातर लोग आईपीएल देखोगे पर जिनका ज़मीर ज़िंदा है, जो कल को आशीष कुमार की तरह सड़क पर कुचले पाए जाना नहीं चाहते, वो इस मुहिम का हिस्सा बनो.
बाकी जिन्होंने शर्म बेच खाई हो, आत्मसम्मान को किनारे रख दिया हो, उनको उच्चाधिकारियों के आदेश पर मुजरा करने के लिए 2500 हज़ार का नकद इनाम मुबारक हो
1 comment:
very nice अभी का ताजे न्यूज जाने यहाँ
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